अहमदाबाद | 8 मार्च 2026: भारतीय क्रिकेट टीम ने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में इतिहास रच दिया है। रविवार रात खेले गए खिताबी मुकाबले में टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड को 96 रनों के विशाल अंतर से करारी शिकस्त दी। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही भारत क्रिकेट के सबसे छोटे प्रारूप का बेताज बादशाह बन गया है।
इस शानदार जीत के बाद क्रिकेट फैंस के मन में यह सवाल उठ रहा है कि अब तक सबसे ज्यादा बार T20 World Cup का खिताब किन टीमों ने जीता है। ‘खबर आंगन’ की स्पोर्ट्स डेस्क आपके लिए 2007 से लेकर 2026 तक के सभी विश्व कप विजेताओं की पूरी और सटीक लिस्ट लेकर आई है।
भारत बना 3 बार चैंपियन बनने वाला इकलौता देश
न्यूजीलैंड को रौंदकर भारतीय टीम ने अपना तीसरा खिताब (2007, 2024 और 2026) अपने नाम कर लिया है। क्रिकेट इतिहास में भारत अब इकलौती ऐसी टीम बन गई है जिसने तीन बार इस प्रतिष्ठित ट्रॉफी को उठाया है।
इससे पहले, महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने 2007 में पहला विश्व कप जीता था। उसके बाद 2024 में रोहित शर्मा की अगुवाई में टीम चैंपियन बनी थी। अब सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारत ने 2026 का खिताब जीतकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया है।
लगातार दो खिताब और घरेलू मैदान पर जीत का पहला रिकॉर्ड
तीन खिताब जीतने के अलावा, टीम इंडिया ने दो और ऐसे बड़े रिकॉर्ड तोड़े हैं जो आज तक कोई देश नहीं कर पाया था। भारत पहली ऐसी टीम बन गई है जिसने अपने विश्व कप खिताब का सफलतापूर्वक बचाव (Defend) किया है।
इसके साथ ही, भारत मेजबान (Host) देश के रूप में भी खिताब जीतने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। अब तक खेले गए सभी संस्करणों में कोई भी मेजबान देश अपने घरेलू मैदान पर यह ट्रॉफी नहीं जीत पाया था।
भारत का चौथा फाइनल और न्यूजीलैंड की दूसरी हार
इस महामुकाबले में उतरते ही टीम इंडिया ने एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया था। यह भारत का चौथा विश्व कप फाइनल था, जो किसी भी अन्य टीम के मुकाबले सबसे अधिक है। भारत ने 2007, 2014, 2024 और 2026 के खिताबी मुकाबलों में जगह बनाई है।
वहीं दूसरी ओर, न्यूजीलैंड की टीम का यह दूसरा फाइनल था। इससे पहले कीवी टीम साल 2021 में ऑस्ट्रेलिया के हाथों फाइनल में हार गई थी। 256 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए न्यूजीलैंड की टीम महज 159 रनों पर सिमट गई और उन्हें एक बार फिर आईसीसी ट्रॉफी के सूखे का सामना करना पड़ा।
इंग्लैंड और वेस्टइंडीज हैं दूसरे पायदान पर
भारत के बाद इस लिस्ट में इंग्लैंड और वेस्टइंडीज की टीमें संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर काबिज हैं। दोनों ही देशों ने अब तक दो-दो बार यह खिताब अपने नाम किया है।
वेस्टइंडीज ने साल 2012 और 2016 में डैरेन सैमी की कप्तानी में इस टूर्नामेंट को जीता था। वहीं, क्रिकेट का जनक माने जाने वाले इंग्लैंड ने साल 2010 और 2022 में चमचमाती ट्रॉफी उठाई थी।
पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के पास 1-1 खिताब
अगर भारत के चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान की बात करें, तो उनके हाथ अब तक केवल एक ही बार यह सफलता लगी है। साल 2007 के पहले संस्करण के फाइनल में भारत से हारने के बाद, पाकिस्तान ने साल 2009 में यूनिस खान की कप्तानी में अपना इकलौता खिताब जीता था।
इसके अलावा, वनडे क्रिकेट में सबसे सफल टीम मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलिया ने केवल एक बार साल 2021 में यह खिताब जीता है। एशियाई दिग्गज श्रीलंका ने भी साल 2014 में भारत को ही फाइनल में हराकर अपना एकमात्र खिताब जीतने का गौरव हासिल किया था।
साल दर साल विश्व कप विजेताओं की पूरी सूची
दर्शकों की सुविधा और ऐतिहासिक जानकारी के लिए ‘खबर आंगन’ 2007 से लेकर 2026 तक के सभी चैंपियंस की सूची पेश कर रहा है:
- 2007: भारत (उपविजेता: पाकिस्तान)
- 2009: पाकिस्तान (उपविजेता: श्रीलंका)
- 2010: इंग्लैंड (उपविजेता: ऑस्ट्रेलिया)
- 2012: वेस्टइंडीज (उपविजेता: श्रीलंका)
- 2014: श्रीलंका (उपविजेता: भारत)
- 2016: वेस्टइंडीज (उपविजेता: इंग्लैंड)
- 2021: ऑस्ट्रेलिया (उपविजेता: न्यूजीलैंड)
- 2022: इंग्लैंड (उपविजेता: पाकिस्तान)
- 2024: भारत (उपविजेता: दक्षिण अफ्रीका)
- 2026: भारत (उपविजेता: न्यूजीलैंड)
हमारा निष्कर्ष
साल 2007 में दक्षिण अफ्रीका से शुरू हुआ यह टूर्नामेंट 2026 में भारत में आकर एक नए मुकाम पर पहुंच गया है। फाइनल मैच में 255 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर बनाकर 96 रनों से जीत दर्ज करना भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम युग को दर्शाता है।
‘खबर आंगन’ की स्पोर्ट्स डेस्क का यह साफ मानना है कि भारत का लगातार दो बार चैंपियन बनना और कुल तीन बार खिताब जीतने वाला दुनिया का पहला देश बनना, यह साबित करता है कि खेल के इस प्रारूप में टीम इंडिया का कोई सानी नहीं है।
पाकिस्तान, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों को पछाड़कर भारत ने जो बादशाहत कायम की है, उसे तोड़ना अब विश्व क्रिकेट में किसी भी देश के लिए लोहे के चने चबाने जैसा होगा। यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के दबदबे का एक ऐतिहासिक प्रमाण है।